Chandra Shekhar Aazad engagement report
@BhimArmyChief - 1.6M followers on X
Measured over 75 original posts from a 30-day window, last computed on August 31, 2026.
Engagement
A typical post picks up 2.0K interactions against 1.6M followers, an engagement rate of 0.124%. Measured over 75 original posts, its engagement rate beats 88% of 3,739 tracked accounts of a similar size. Comparing inside a size band matters here: engagement rate falls as accounts grow, so a raw rate would mostly just re-measure the follower count. Posts are seen about 53K times each, and 3.72% of those impressions turn into an interaction. That is about 3.33% of the follower count, which is the gap between an audience on paper and an audience in a timeline. Posting runs at about 2.6 posts a day over the last 30 days, with activity on almost every day in the window. Most posts go out around 04:00 UTC, and Monday is the busiest day of the week. Of the 75 posts sampled, 84% carry an image or video. The account's strongest tracked post pulled 15K interactions, about 7.8x its own typical post. Recurring topics include #independenceday, #happyindependenceday, #happyindependenceday2026.
Measured over 75 original posts from a 30-day window, last computed on August 31, 2026. Recurring tags: #independenceday, #happyindependenceday, #happyindependenceday2026.
Compared with accounts its own size
Chandra Shekhar Aazad's engagement rate beats 88% of the tracked X accounts closest to it in follower count (3,739 accounts, accounts of similar size (decile 10 of 10)). A percentile is spread evenly by construction, so 50 really is the middle of that group and 90 really is its top tenth.
On engagement per impression rather than per follower it beats 91% of the same group. When those two numbers disagree, the gap is about how far its posts travel rather than how people react to them.
Where this sits in the catalog
At 0.124%, Chandra Shekhar Aazad sits above the 50th percentile of the 36,378 accounts in this comparison. That places it in the above the median band, which runs 0.08% to 0.432%.
Show the percentile table
| Percentile | Engagement rate |
|---|---|
| 10th percentile | 0.002% |
| 25th percentile | 0.012% |
| 50th percentile | 0.08% |
| 75th percentile | 0.432% |
| 90th percentile | 2.10% |
| 99th percentile | 161.0% |
This ruler is the whole measured catalog, not a size-matched group: it shows where the raw rate falls across every account we can measure, all of which are large. For a like-for-like comparison, read the size-band percentile above instead. See how the bands are built
Posting timing
This account posts most often around 04:00 UTC, and Monday is its busiest day of the week. The bars below are the catalog-wide pattern, with this account's own busiest slot marked. They do not show how this account performs at each hour: we keep one aggregate per account, not one per hour, so that measurement does not exist in our data.
Show engagement by hour posted, utc as a table
| Hour (UTC) | Vs author median | Posts |
|---|---|---|
| 00:00 UTC | -1% | 50K |
| 01:00 UTC | -2% | 51K |
| 02:00 UTC | -3% | 50K |
| 03:00 UTC | -4% | 53K |
| 04:00 UTC | -6% | 43K |
| 05:00 UTC | -4% | 42K |
| 06:00 UTC | -4% | 48K |
| 07:00 UTC | -5% | 52K |
| 08:00 UTC | -4% | 60K |
| 09:00 UTC | -3% | 69K |
| 10:00 UTC | -2% | 72K |
| 11:00 UTC | -3% | 78K |
| 12:00 UTC | -2% | 86K |
| 13:00 UTC | -2% | 94K |
| 14:00 UTC | -4% | 97K |
| 15:00 UTC | -2% | 100K |
| 16:00 UTC | -3% | 97K |
| 17:00 UTC | -2% | 90K |
| 18:00 UTC | -1% | 84K |
| 19:00 UTC | -2% | 79K |
| 20:00 UTC | -1% | 74K |
| 21:00 UTC | -1% | 66K |
| 22:00 UTC | -2% | 57K |
| 23:00 UTC | -2% | 51K |
Show engagement by day of week as a table
| Day | Vs author median | Posts |
|---|---|---|
| Sunday | +4% | 230K |
| Monday | 0% | 286K |
| Tuesday | -2% | 276K |
| Wednesday | -1% | 251K |
| Thursday | -1% | 244K |
| Friday | -3% | 252K |
| Saturday | +3% | 227K |
Best tweets
- Aug 15, 20267.8x their median
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस वीडियो के साथ यह बात बड़े ही व्यथित मन से लिख रहा हूं कि मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यह 16 वर्षीय बच्ची का शव नहीं, पेड़ से उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था लटकी हुई है। उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के ग्राम शंकरपुर में 16 वर्षीय सबरीन बानो का संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलना बेहद दुखद और चिंताजनक है। परिजनों के अनुसार, 11 अगस्त 2026 की शाम करीब 4 बजे सबरीन घर से लापता हुई। परिजनों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 12 अगस्त को दोबारा सूचना देने के बावजूद पुलिस का रवैया नहीं बदला। 14 अगस्त को भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं से संपर्क करने और पुलिस पर दबाव बनने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। उसी शाम बच्ची का शव बरामद हुआ। परिजनों के अनुसार, उनकी बेटी को अगवा कर उसके साथ बलात्कार के बाद हत्या की गई। यह बेहद गंभीर आरोप है, जिसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 11 अगस्त को बच्ची के लापता होने की सूचना मिलने के बाद 14 अगस्त तक पुलिस ने क्या कार्रवाई की? अगर समय रहते पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती, तो शायद आज एक परिवार अपनी बेटी को न खोता। 14 अगस्त को उसका शव मिलने के बावजूद अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, तब एक मां-बाप अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह कैसी आजादी है, जहां एक बेटी की सुरक्षा के लिए भी परिवार को पुलिस पर दबाव बनाना पड़े? @UPGovt पुलिस की लापरवाही की निष्पक्ष जांच कराए, जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो, आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो और सबरीन बानो को न्याय मिले। हमारी संवेदनाएँ शोकाकुल परिवार के साथ हैं और न्याय की इस लड़ाई में हम उनके साथ हैं
- Aug 7, 20266.3x their median
उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी दलित युवा नवप्रवर्तक रवि टम्टा जी का यह नवाचार वास्तव में अद्भुत, प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण है। सुदूर पहाड़ में जन्मे रवि टम्टा जी ने साबित कर दिया कि उनके हौसले भी पहाड़ जैसे बुलंद हैं। रवि टम्टा जी ने HAPIDA SKYNeX उड़ान वाहन (Flying Vehicle) के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वे सुरक्षित एवं विद्युत चालित व्यक्तिगत उड़ान वाहन विकसित करने के उद्देश्य से कार्य कर रहे हैं। वर्षों के शोध, नवाचार और अथक परिश्रम के बाद प्रोटोटाइप की यह सफल उड़ान उनके सपने को साकार करने की दिशा में पहला बड़ा मील का पत्थर है। यह उपलब्धि केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। ऐसे स्वदेशी नवाचार भारत की वैज्ञानिक क्षमता, युवाओं की प्रतिभा और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं। रवि टम्टा जी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत मंगलकामनाएं। हमें विश्वास है कि उनका यह प्रयास भारत को भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमें आप पर गर्व है!
- Aug 29, 20265.1x their median
जिला बदायूं के दातागंज थाना क्षेत्र में दलित युवक राजेश कोरी की पुलिस कस्टडी में मौत बेहद दुखद,गंभीर और चिन्ताजनक है। परिजनों के अनुसार, पुलिस की पिटाई के बाद राजेश की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। अब हवालात के अंदर का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें राजेश पानी पीने की हालत में तक नजर नहीं आ रहा है और पुलिसकर्मी के हाथ छोड़ते ही वह जमीन पर गिर जाता है। यह वीडियो पुलिस की भूमिका और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस कह रही है कि पहले राजेश की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि अगर राजेश की हालत इतनी खराब थी तो उसे समय रहते इलाज क्यों नहीं दिया गया? सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस के बचाव में परिजनों से तहरीर लेकर दूसरे पक्ष के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। अगर हत्या हुई थी, तो राजेश पुलिस की हवालात में क्यों था? और अगर वह पुलिस हिरासत में सुरक्षित था, तो हवालात के अंदर उसकी हालत इतनी गंभीर कैसे हुई? दातागंज थाने के CCTV फुटेज को तत्काल सुरक्षित कर सार्वजनिक किया जाए। पुलिस हिरासत में हुई इस मौत की जांच उसी पुलिस तंत्र से नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए। मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी जवाब दें कि दलित युवक राजेश कोरी की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? @UPGovt से हमारी मांग है कि पुलिस हिरासत में हुई दलित युवक राजेश कोरी की मौत की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। दोषियों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा मृतक के परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए। हमारी संवेदनाएँ भाई राजेश कोरी के शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
- Aug 16, 20265.0x their median
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री @pushkardhami जी की अपनी विधानसभा चंपावत (जिला चंपावत) का यह वीडियो बेहद डरावना और चिंताजनक है। बुंगा दुर्गा पीपल के बच्चे रोजाना करीब 4 किलोमीटर पैदल चलकर ककनई इंटर कॉलेज जाते हैं। बारिश आते ही रास्ते में उफनती नदी आ जाती है और यही नौनिहाल अपनी जान हथेली पर रखकर नदी पार करने को मजबूर होते हैं। मुख्यमंत्री जी, सोचिए अगर ये आपके बच्चे होते तो क्या आप उन्हें इस तरह जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने देते? और वैसे भी, आप मुख्यमंत्री होने के नाते हर बच्चे की सुरक्षा और शिक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। शर्मनाक विफलता!
- Aug 15, 20264.6x their median
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर जी को भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना इतिहास के प्रति उनके अल्पज्ञान और स्वतंत्रता संग्राम के एक महान सेनानी के योगदान को राजनीतिक चश्मे से देखने का उदाहरण है। मौलाना मोहम्मद अली जौहर जी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी, निर्भीक पत्रकार, शिक्षाविद और राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध मुखर होकर आवाज उठाई, जेल की यातनाएं सहीं और खिलाफत तथा असहयोग आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1930 में लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में उन्होंने भारत की स्वतंत्रता और स्वशासन की मांग मजबूती से उठाई। उन्होंने गुलाम भारत में लौटने से इनकार करते हुए आजादी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की। 4 जनवरी 1931 को लंदन में उनका निधन हो गया। इतिहास का एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर जी के निधन के दो वर्ष बाद, 1933 में, पहली बार ‘Pakistan’ नाम के साथ एक अलग राष्ट्र के गठन का प्रस्ताव रखा गया। ऐसे में 1931 में दुनिया छोड़ चुके मौलाना मोहम्मद अली जौहर जी को 1933 में सामने आए ‘Pakistan’ के प्रस्ताव और 1947 में हुए भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराना इतिहास की घटनाओं, उनके कालक्रम और उनके वास्तविक राजनीतिक योगदान तीनों की अनदेखी है। इतिहास को राजनीतिक चश्मे से नहीं, तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर पढ़ा जाना चाहिए। “जानकारी का टोटा, बयानों की भरमार!”
- Aug 27, 20263.6x their median
शामली जनपद में हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या बेहद दुखद और चिंताजनक है। कल शाम (26 अगस्त 2026) जिम से निकलकर घर जाते समय अंकित पर चार से अधिक हमलावरों ने ऑटोमेटिक हथियारों से ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिसमें उन्हें कई गोलियां लगीं। अंकित बालियान की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर एक गैंग द्वारा जिम्मेदारी लेने वाली पोस्ट सामने आना बेहद गंभीर है क्योंकि संगठित गिरोहबंदी के खात्मे का दावा पुलिस करती रही है, उसके बावजूद शहर के बीचोंबीच इस तरह बेखौफ होकर हत्या होना बताता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं। मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, अभी तक किसी की गिरफ्तारी न होना भी आपकी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। @UPGovt हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार कर इस हत्याकांड के पीछे सक्रिय पूरे आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश करे और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। हमारी संवेदनाएँ अंकित बालियान के शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
- Aug 19, 20263.3x their median
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के रैपुरा गांव के पास कीचड़ और जलभराव से बदहाल सड़क को लेकर बरसते पानी के बीच हाइवे पर प्रदर्शन कर रहे स्कूली छात्र-छात्राओं (Zen-Alpha) के साथ पुलिस द्वारा बदसलूकी का मामला बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। रैपुरा, मझलवारा, बनियातला और महानपुरा को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग गड्ढों और जलभराव में तब्दील है। आए दिन ई-रिक्शा और ऑटो पलटने से स्कूली बच्चे चोटिल हो रहे हैं। मजबूर होकर बच्चे अपनी जायज़ मांग लेकर हाइवे पर उतरे, लेकिन उनकी समस्या सुनने के बजाय उन्हें हड़काया गया और उनके साथ बदसलूकी की गई। बच्चे सड़क मांग रहे हैं, बदसलूकी नहीं। बच्चों की आवाज बुलंद रहे।
- Aug 28, 20263.2x their median
वंचितों की हिस्सेदारी के विरोधियों का दोहरा चरित्र देश के सामने है। पहले ‘आरक्षण हटाओ’ और अब ‘आरक्षण में सुधार’ की मांग करने वालों से तत्काल “सौहार्दपूर्ण वार्ता” लेकिन अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज, आख़िर ये कैसा सौहार्द है, नड्डा जी? एक तरफ वार्ता की तस्वीरें, दूसरी तरफ छात्रों पर लाठियाँ, यह दोहरा चरित्र अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। 24 सितंबर 1982 को मान्यवर कांशीराम साहब ने पूना पैक्ट के 50 साल पूरे होने पर पूरे देश में “धिक्कार दिवस” मनाया था। यह कोई साधारण विरोध नहीं था, बल्कि एक अकाट्य राजनीतिक और सामाजिक समझ का नायाब उदाहरण था। परम पूज्य बाबा साहेब ने जिस पूना पैक्ट पर बड़े दुखी मन से हस्ताक्षर किए थे, आज उसी पूना पैक्ट का दुष्परिणाम “Depressed Classes (वंचित वर्ग)” के सामने है। यही कारण है कि जब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा जी आरक्षण विरोधियों से मुलाकात करते हैं, तो बहुजन समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। किसान आंदोलन पर जिस सरकार ने 13 महीने बाद सुध ली, पेपर लीक के जनव्यापी आंदोलन के आंदोलनकारियों से नड्डा जी एक महीने बाद मिलने का समय निकाल पाए, लेकिन जैसे ही जातीय वर्चस्व बनाए रखने की जिद लिए कुछ मुट्ठीभर लोग भाजपा-RSS के दिल में छुपे एजेंडे को लेकर इकट्ठा होते हैं, तो तुरंत “सौहार्दपूर्ण वार्ता” होने लगती है। सरकार को जवाब देना होगा कि ऐसे लोगों से आखिर क्या बात हुई और आरक्षण को लेकर सरकार का रुख क्या है? आरक्षण कोई राजनीतिक खैरात नहीं, बल्कि सामाजिक गैर-बराबरी के रहते संविधान द्वारा सुनिश्चित प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की व्यवस्था है। जब तक भेदभाव और गैर-बराबरी कायम है, तब तक आरक्षण भी कायम रहेगा। मुट्ठीभर जातंकवादियों की आड़ में वंचितों की संवैधानिक हिस्सेदारी को कमजोर करने की साजिश कर रहे सरकार के पिट्ठुओं, कान खोलकर सुन लो! भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) 24 सितंबर, पूना पैक्ट दिवस पर दिल्ली में एक बड़ा जनांदोलन करके संविधान की ताकत का एहसास कराएगी। जय भीम! जय भारत! जय मंडल! जय संविधान! जय आरक्षण!
- Aug 17, 20263.2x their median
लखनऊ के पारा स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं का सुबह 6 बजे से मूसलाधार बारिश के बीच विद्यालय की बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ सड़क पर उतरना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। शिक्षकों की भारी कमी, खराब भोजन और बीमार होने पर समय से इलाज न मिलना सरकार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है। छात्राओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर सड़क से लेकर संसद तक लगातार आवाज उठाकर बार-बार सरकारों को चेताया था, लेकिन बुलडोजर के माध्यम से तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकारों ने हमारी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और आज हालात यह हैं कि उन्होंने न केवल शिक्षा व्यवस्था को, बल्कि पूरी व्यवस्था को ही बुलडोज कर दिया गया है। इसी का परिणाम है कि जिस उम्र में इन Gen-Alpha बच्चों के हाथों में खिलौने, किताबें और सपने होने चाहिए थे, आज उसी उम्र में वे अपने भविष्य और शिक्षा के अधिकार के लिए सड़क पर लड़ने को मजबूर हैं। “जियो Gen-Alpha!”
- Aug 21, 20263.2x their median
मेरठ में मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस हिरासत में हुई बर्बरता कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल करने वाली हैं। पीड़ितों का आरोप है कि तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय ने दोनों को अपने कार्यालय बुलाकर गालियां दीं और चैंबर बंद कर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद SOG के हवाले कर उन्हें पैर बांधकर उल्टा लटकाने और फट्टों-लाठियों से बेरहमी से पीटने का भी आरोप है। मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यह पुलिसिंग नहीं, बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग और हिरासत में यातना है। किसी भी अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। @UPGovt तत्काल CCTV फुटेज सुरक्षित कराए, पीड़ितों का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण कराए और आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो। वर्दी कानून से बड़ी नहीं है और आम नागरिकों की आवाज को पुलिसिया ताकत के बल पर दबाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। @India_NHRC
Ranked by total interactions across everything we have tracked for this account, which is a longer history than the 30-day window the rates above use. The multiple compares each post to this account's own median.
Recurring topics
The most frequent hashtags in the sampled posts. They describe what this account writes about; they are not a performance signal, and the catalog-wide breakdown on the hub shows how little hashtag count moves.
Buy or sell X accounts - escrow-protected
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Reading these numbers
A typical post picks up 2.0K interactions against 1.6M followers, an engagement rate of 0.124%. Measured over 75 original posts, its engagement rate beats 88% of 3,739 tracked accounts of a similar size. Comparing inside a size band matters here: engagement rate falls as accounts grow, so a raw rate would mostly just re-measure the follower count. Posts are seen about 53K times each, and 3.72% of those impressions turn into an interaction. That is about 3.33% of the follower count, which is the gap between an audience on paper and an audience in a timeline. Posting runs at about 2.6 posts a day over the last 30 days, with activity on almost every day in the window. Most posts go out around 04:00 UTC, and Monday is the busiest day of the week. Of the 75 posts sampled, 84% carry an image or video. The account's strongest tracked post pulled 15K interactions, about 7.8x its own typical post. Recurring topics include #independenceday, #happyindependenceday, #happyindependenceday2026.
- What is Chandra Shekhar Aazad's engagement rate on X?
- Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) has an engagement rate of 0.124%, based on the median interactions across 75 original posts from the last 30 days against 1,580,458 followers. Replies, reposts and quote-posts of other people are excluded from that sample.
- Is that a good engagement rate?
- At 0.124%, Chandra Shekhar Aazad sits above the 50th percentile of the 36,378 accounts in this comparison. Those comparison accounts are all large ones, because our scanning cadence is weighted towards big accounts, so this is a ranking among peers of similar scale rather than a ranking across X.
- Does @BhimArmyChief have real engagement?
- Its engagement rate beats 88% of the tracked X accounts closest to it in follower count (3,739 accounts), which puts it in the top quarter for its size group. Ranking inside a size band matters because engagement rate falls as accounts grow, so a raw rate would mostly re-measure the follower count. It is a starting point for a look at follower quality, not a verdict on it.
- When does @BhimArmyChief post?
- Most posts go out around 04:00 UTC, and Monday is its busiest day, at roughly 2.6 posts per day across the measured window.